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क्या सरकारी स्कूलों को बंद करना समस्या का समाधान है..? • नारी शक्ति उत्थान और अधिकारों के अग्रदूत: बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का ऐतिहासिक योगदान । • जनता देश संगठन कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर पदाधिकारियों के साथ वार्तालाप करते हुवे। • जनता देश संगठन कार्यालय का वर्तमान स्थायी पता। • जनता देश संगठन कार्यालय का मुख्य द्वार। • जनता देश संगठन कार्यालय उद्घाटन के अवसर पर हवन । • जनता देश संगठन कार्यालय का उद्घाटन दिनांक: 18/10/2026 • जनता देश संगठन का संघर्षों भरा सफर / प्रिंट मिडिया / अख़बारों के द्वारा। • क्या सरकारी स्कूलों को बंद करना समस्या का समाधान है..? • नारी शक्ति उत्थान और अधिकारों के अग्रदूत: बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का ऐतिहासिक योगदान । •

हमारी कहानी

जनता देश संगठन की यात्रा

एक व्यक्ति के जीवन अनुभवों से जन्मा समाज के प्रति एक व्यापक संकल्प

जनता देश संगठन का निर्माण किसी एक घटना, अभियान या विचार का परिणाम नहीं था। इसके पीछे संस्थापक श्री सुरेश कुमार के जीवन के कई अनुभव, संघर्ष, सामाजिक परिस्थितियाँ और वह प्रश्न था जो धीरे-धीरे उनके जीवन का उद्देश्य बन गया।

क्या समाज के सामान्य व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और न्याय जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए इतना संघर्ष करना ही पड़ेगा?

संगठन का परिचय

हमारे बारे में • दस्तावेज़

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प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है

जीवन में प्रेरणा किसी भी व्यक्ति, घटना या परिस्थिति से मिल सकती है। कभी किसी महान व्यक्ति का जीवन प्रेरित करता है, कभी साहित्य, इतिहास अथवा कोई विचार और कभी स्वयं जीवन में घटी कोई घटना हमारे सोचने का तरीका बदल देती है।

श्री सुरेश कुमार के जीवन में भी ऐसे अनेक अनुभव आए जिन्होंने धीरे-धीरे उनकी सोच और जीवन के उद्देश्य को आकार दिया।

उनके लिए प्रेरणा केवल प्रसिद्ध व्यक्तित्वों से नहीं आई, बल्कि साधारण लोगों के संघर्ष, सामाजिक पीड़ा और अपने आसपास देखी गई परिस्थितियों से भी मिली।

भारत के सामाजिक जीवन और इतिहास में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जैसे व्यक्तित्वों के संघर्ष, समानता और न्याय के विचार ने भी उनके चिंतन को प्रभावित किया।

अपने आसपास उन्होंने ऐसे अनेक उदाहरण देखे जिनमें विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मनुष्य ने अपने जीवन को उद्देश्य और संकल्प से आगे बढ़ाया।

यह सब उनके भीतर एक प्रश्न को लगातार जीवित रखता रहा:

मनुष्य अपने जीवन का उपयोग केवल अपने लिए करे या समाज के लिए भी कुछ ऐसा छोड़े जिससे दूसरों का जीवन बेहतर हो सके?

02

संघर्ष को बहुत करीब से देखने का अवसर

श्री सुरेश कुमार बताते हैं कि उनके पिता ने जीवन में अनेक आर्थिक, पारिवारिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना किया।

परिवार के सीमित संसाधनों और अनेक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने दायित्वों को निभाया।

उनका जीवन यह समझाने वाला था कि किसी व्यक्ति की परिस्थितियाँ कठिन हो सकती हैं, परंतु उसका कर्तव्य और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी उससे समाप्त नहीं होती।

बचपन और युवावस्था में इन अनुभवों को देखकर श्री सुरेश कुमार के भीतर समाज और सामान्य व्यक्ति की कठिनाइयों को समझने की संवेदनशीलता विकसित हुई।

यही अनुभव आगे चलकर उनके सामाजिक जीवन की सोच का आधार बने।

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परिवार, त्याग और मानवीय संवेदना

उनके जीवन पर उनकी माता का भी गहरा प्रभाव रहा।

परिवार और जीवन की कठिन परिस्थितियों में एक माँ की भूमिका, त्याग, भावनात्मक शक्ति और अपने परिवार के प्रति समर्पण ने उन्हें बचपन से प्रभावित किया।

श्री सुरेश कुमार के अनुसार जीवन की अनेक कठिन परिस्थितियों ने उन्हें यह समझाया कि समाज के हर व्यक्ति के पीछे एक परिवार, संघर्ष और कहानी होती है।

इसीलिए किसी की समस्या को केवल प्रशासनिक या आर्थिक प्रश्न के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टि से देखना आवश्यक है।

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इतिहास, समाज और महान व्यक्तित्व

श्री सुरेश कुमार का चिंतन केवल व्यक्तिगत अनुभवों तक सीमित नहीं रहा।

वे महापुरुषों और समाज सुधारकों के जीवन से भी प्रभावित हुए।

उनके लिए स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह और अन्य महान व्यक्तित्वों का जीवन यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपने निजी हितों से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए काम कर सकता है।

लेकिन उनके सामाजिक जीवन को सबसे निर्णायक दिशा किसी पुस्तक अथवा भाषण ने नहीं, बल्कि स्वयं उनके जीवन में आए अनुभवों ने दी।

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स्वास्थ्य व्यवस्था के भीतर देखा एक अलग भारत

वर्ष 2019 में श्री सुरेश कुमार पंजाब में पोस्टिंग पर थे।

उसी दौरान उनकी तबीयत इतनी खराब हुई कि उनके छोटे भाई को दिल्ली से पठानकोट आना पड़ा।

शताब्दी एक्सप्रेस से वह सहारनपुर पहुँचे, जहाँ कुछ परिचित पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। वहाँ से उन्हें सीधे जिला अस्पताल ले जाया गया।

प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया।

यहीं से उनके जीवन का वह अनुभव शुरू हुआ जिसने उनकी सामाजिक सोच को गहराई से बदल दिया।

अस्पताल के विशाल परिसर और उपलब्ध संसाधनों को देखकर शुरुआत में आशा हुई।

लेकिन अस्पताल के भीतर वास्तविक स्थिति देखने के बाद यह आशा धीरे-धीरे निराशा में बदलती गई।

उन्होंने देखा कि अस्पताल में संसाधनों, दवाओं और व्यवस्थाओं की कमी के कारण मरीजों और उनके परिवारों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

उन्हें यह प्रश्न परेशान करने लगा कि यदि एक सरकारी संस्था इसी उद्देश्य से बनाई गई है कि गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को चिकित्सा मिल सके, तो फिर उसे इलाज के लिए बाहर क्यों भटकना पड़े?

उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था और समस्याओं को समझने का प्रयास किया और पाया कि इलाज से जुड़ी अनेक मूलभूत सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता थी।

यही वह समय था जब उनके मन में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केवल शिकायत नहीं, बल्कि समाधान खोजने की इच्छा पैदा हुई।

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व्यवस्था ऐसी क्यों है, और इसे बेहतर कैसे बनाया जाए?

अस्पताल में रहते हुए उनके मन में एक प्रश्न बार-बार आता रहा:

यदि कोई साधनहीन व्यक्ति यहाँ आए तो वह क्या करेगा?

यह अनुभव उनके लिए व्यक्तिगत बीमारी से कहीं बड़ा बन गया।

उन्होंने महसूस किया कि समाज में ऐसे लाखों लोग हैं जिनके पास न पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं, न प्रभाव और न ही व्यवस्था तक आसान पहुँच।

यही सोच धीरे-धीरे एक सामाजिक संकल्प में बदलने लगी:

यदि व्यवस्था में समस्या है, तो केवल उसकी आलोचना नहीं, उसे सुधारने के लिए संगठित प्रयास होना चाहिए।

जनता देश संगठन का जन्म

व्यक्तिगत अनुभव से
सामूहिक अभियान तक

अपनी सोच को केवल विचार तक सीमित रखने के बजाय श्री सुरेश कुमार ने अपने कुछ विश्वसनीय सामाजिक साथियों के साथ इसे एक संगठित रूप देने का निर्णय लिया।

2019

स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा निर्णायक अनुभव

10 दिसंबर 2019

जनता देश संगठन की स्थापना

31 जुलाई 2021

नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक समाज सेवा

आज

शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और सामाजिक न्याय पर सक्रिय कार्य

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शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार

जनता देश संगठन का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, चिकित्सा और रोज़गार है।

इन तीनों को संगठन एक सम्मानजनक जीवन की आधारभूत आवश्यकताएँ मानता है।

संगठन का मानना है कि शिक्षा के बिना अवसर सीमित हो जाते हैं, स्वास्थ्य के बिना जीवन असुरक्षित हो जाता है और रोज़गार के बिना व्यक्ति तथा परिवार आत्मनिर्भर नहीं हो सकते।

इसलिए JDS का प्रयास है कि इन क्षेत्रों में सरकार, समाज और नागरिकों के बीच सकारात्मक सहयोग और जनभागीदारी को मजबूत किया जाए।

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हमारे प्रमुख संघर्ष

स्वास्थ्य

संगठन ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ज्ञापन, रैलियाँ, धरना-प्रदर्शन, पदयात्राएँ, हस्ताक्षर अभियान और अन्य शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक माध्यम अपनाए हैं।

विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों और उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता को लेकर संगठन ने लगातार आवाज उठाई।

रोज़गार एवं महिला सशक्तिकरण

संगठन ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी समूह-सखी महिलाओं के रोज़गार, उचित वेतन, स्थायी नियुक्ति और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सक्रिय रहा है।

संगठन का मत है कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब उन्हें सम्मानजनक रोज़गार और आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त हो।

शिक्षा

संगठन का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा प्राथमिक शिक्षा से वंचित न रहे।

प्राथमिक विद्यालयों की निरंतरता और शिक्षा की उपलब्धता को लेकर संगठन ने जनजागरूकता अभियान तथा विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी बात रखी है।

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समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी

जनता देश संगठन का मानना है कि समाज सेवा का अर्थ किसी एक वर्ग, धर्म, जाति अथवा समुदाय तक सीमित रहना नहीं है।

संगठन सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को समान रूप से साथ लेकर समाज और देश की सेवा करने की भावना से कार्य करता है।

हमारा उद्देश्य केवल समस्याएँ बताना नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन और नागरिकों को साथ लेकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।

साथ मिलकर बदलाव

बदलाव दर्शक बनकर नहीं, सहभागी बनकर आता है

यदि आप शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, महिला सशक्तिकरण अथवा जनहित के किसी क्षेत्र में अपना समय, अनुभव या सहयोग देना चाहते हैं, तो जनता देश संगठन आपका स्वागत करता है।