भारत के संविधान निर्माता, महान समाज सुधारक और चिंतक बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का दृष्टिकोण केवल कानून या राजनीति तक सीमित नहीं था। उन्होंने भारत में लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों की ऐसी नींव रखी, जो आज लाखों महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बाबा साहेब का स्पष्ट मानना था: “मैं किसी समाज की प्रगति का आकलन इस बात से करता हूँ कि उस समाज की महिलाओं ने कितनी प्रगति की है।“
1. शिक्षा को बनाया सशक्तिकरण का सबसे बड़ा हथियार: बाबा साहेब जानते थे कि बिना शिक्षा के कोई भी समाज या व्यक्ति आत्मनिर्भर नहीं बन सकता। उन्होंने महिलाओं और बच्चों से आह्वान किया कि शिक्षा ही स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान का मूल मंत्र है। उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं की समान शिक्षा की वकालत की। अपने प्रसिद्ध संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो“ के माध्यम से महिलाओं को अपनी आवाज़ बुलंद करने की प्रेरणा दी।
2. हिंदू कोड बिल: अधिकारों की ऐतिहासिक क्रांति: महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए बाबा साहेब ने ‘हिंदू कोड बिल’ पेश किया। इस विधेयक ने महिलाओं को कानूनी रूप से सशक्त बनाया: संपत्ति में अधिकार: महिलाओं को पिता और पति की संपत्ति में समान अधिकार प्रदान किया। विवाह और तलाक के नियम: बाल विवाह, बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं को समाप्त कर महिलाओं को विवाह और सम्मानपूर्वक अलग होने के अधिकार दिए। गोद लेने का अधिकार: महिलाओं को बच्चा कानूनी रूप से गोद लेने की स्वतंत्रता दी। संविधान में लैंगिक समानता की गारंटी
3. संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि भारत का प्रत्येक नागरिक कानून के सामने समान हो। अनुच्छेद 15: लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। समान काम के लिए समान वेतन: कामकाजी महिलाओं को पुरुषों के समान वेतन प्राप्त करने का अधिकार सुनिश्चित किया गया। मातृत्व लाभ (Maternity Benefit): वाइसरॉय काउंसिल में रहते हुए उन्होंने कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश और सुरक्षा से जुड़े कानून बनाने में अहम भूमिका निभाई।
4, युवाओं, बच्चों और महिलाओं के लिए संदेश: युवाओं और बच्चों के लिए: बाबा साहेब का जीवन सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, शिक्षा और सही सोच से सामाजिक बुराइयों को मिटाया जा सकता है। आज के युवाओं को हर क्षेत्र में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की भावना को आत्मसात करना चाहिए। महिलाओं के लिए: बाबा साहेब ने महिलाओं को केवल अधिकार ही नहीं दिए, बल्कि उनमें आत्म-विश्वास और नेतृत्व की भावना भी जगाई। आज की नारी को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए। डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन और उनके विचार भारत की हर महिला, बच्चे और युवा को एक न्यायपूर्ण, समान और सशक्त समाज के निर्माण की ओर बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
सुरेश कुमार (फौजी)
संस्थापक एवं राष्ट्रिय अध्यक्ष
जनता देश संगठन (जेडीएस)